जी-7 समूह देशों का 45वां शिखर सम्मेलन फ्रांस में हो रहा है. इस सम्मेलन में भारत को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने फ्रांस जाएंगे.

G-7 का सदस्य नहीं है भारत, फिर भी इस बड़े मंच पर PM मोदी को मिला न्यौता, खास वजह-__भारतीय प्रधानमंत्री का विदेश दौरा आमतौर पर हमेशा चर्चा में रहता है लेकिन इस बार प्रधानमंत्री जी को स्वयं G-7 मैं आने का न्योता मिला है यद्यपि आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत जी 7 देशों का सदस्य नहीं है
इन दिनों भारतीय प्रधानमंत्री विश्व स्तर पर भारत की छवि को सुधारने एवं भारतीय अर्थव्यवस्था को दिशा देने में प्रयासरत हैं।
       यद्यपि भारत जी 7 देशों में सम्मिलित नहीं है परंतु इसमें उन देशों को भी आमंत्रण मिला है जो राजनीतिक दृष्टि से वैश्विक स्तर पर विशेष स्थान रखते हैं।
   भर्ती प्रधानमंत्री जलवायु समुद्री मार्ग एवं डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन पर अपना संबोधन प्रस्तुत करेंगे।
   
हो सकता है इस जी शिखर सम्मेलन में भारत द्वारा कश्मीर पर चर्चा भी की जाएगी और कश्मीर की वर्तमान स्थिति के बारे में भारतीय प्रधानमंत्री विश्व स्तर पर अपनी बात रखेंगे ।

1975 में G7 की नींव रखी गई थी वैश्विक स्तर पर आर्थिक समस्याओं को लेकर सुधारात्मक पहलू को देखते हुए इस G7 को बनाया गया जिसमें कुल 7 देशों ने भाग लेकर इसे वर्तमान परिदृश्य में पहुंचाया।
कौन-कौन से देश है इसमें -। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमरीका शामिल हैं. इसे ग्रुप ऑफ़ सेवन भी कहते हैं.

जी-7 कितना प्रभावी।  ?

जी-7 की आलोचना यह कह कर की जाती है कि यह कभी भी प्रभावी संगठन नहीं रहा है, हालांकि समूह कई सफलताओं का दावा करता है, जिनमें एड्स, टीबी और मलेरिया से लड़ने के लिए वैश्विक फंड की शुरुआत करना भी है. समूह का दावा है कि इसने साल 2002 के बाद से अब तक 2.7 करोड़ लोगों की जान बचाई है.

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